डॉक्टर मेला - POST

 *गुलशन के, एक गुल ने कहा- सुन ज़रा 'मेला' !*

*आपस की 'लड़ाई में हम, शर्मिंदा नहीं रहते!*

 *माली तो 'सियासी है, वो तोड़ के रख देगा ।*

*कांटों से 'जुदा होकर , हम ज़िंदा नहीं रहते!!*

Dr.Mela

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जिनके लिए देश का भविष्य कहलाने वाले युवा विद्यार्थियों के दिल में ,

अपार सम्मान है।

 जिससे एक बड़ी उम्मीद है, 

जो उनके लिए सफलता की गारंटी है... । 

जाति और धर्म भूलकर जिस इंसान को स्टूडेंट अपना भगवान मान रहे हैं...

*उस 'खान सर, को फैसल खान समझ कर एक भटकी हुई भीड़ नाजायज तरीके से अपराधी, पाकिस्तानी आतंकवादी बोलने वाले लोग... ,*

उन पर इल्जाम लगाने में इतनी बेजोड़ मेहनत कर रहे हैं । 

जो अपने बदबूदार मुंह में गुटका और पान , तंबाकू भरकर शिक्षा के एक स्तंभ पर थूक देना चाहते हैं... 

क्योंकि उन्हें फैसल खानों से नफ़रत है।

 सच्ची शिक्षा से नफ़रत है , 

आपसी भाईचारा से परहेज है! 

जिनको शायद अपने ही बच्चों के भविष्य से नफ़रत है।

ऐसे लोग एक अनजाने नशे में किसी 2000  रूपए की नोट में चिप लगा होता है,

 बताने वाली ' मैडम, की तरफ से कंधा लगा रहे हैं।

 क्या ऐसे लोग किसी मिशन के तहत अपना दिमाग गिरवी रख चुके हैं?

क्या लोगों को लोकहित के ऐसे मुद्दों की बहुत खबर नहीं है कि ... 

विदेश में सरकारी आयोजन का आनंद डेढ़ सौ वीआईपी लोग लंदन में बैडमिंटन आयोजन के नाम पर... करोड़ों रुपए बर्बाद कर रहे हैं!

सरकारी खर्च पर मौज मस्ती वाली खेल प्रेमी सरकार और न्यायपालिका की 'दमदार जोड़ी ,

 शायद लोकहित पर ही काम करने गई हो।

ऐसी खबरों पर ध्यान नहीं है।

लेकिन नहीं, सारी बातों को भूलकर 'खान सर को,

  पाकिस्तान और मुस्लिम परस्त गद्दार चमचा आदि कहकर ,

अपने मन की पीड़ा लोग शांत कर लेंगे। 

*जितनी मेहनत लगन और रिस्क लेकर आप लोकहित की इतनी गंभीर खबरें प्रकाशित करते हैं ।*

तमाम जन्म के दिमागी अंधों को आईना दिखाते हैं।

 इसके बदले में कभी कोई आपको शुक्रिया बोलना चाहता है।

भाड़ में जाने दो ऐसी भीड़ को जो केवल झंडा ढोने के लिए पैदा हुई है। 

अंत में प्रकृति सब ठीक करेगी। 

हमें मंगल पांडे और चंद्रशेखर आजाद जैसों से सीख लेना चाहिए।

एक बार उनके परिवार वालों से मिलिए बहुत अच्छा लगेगा...

*जैसे कुछ लोगों को गोडसे दुनिया के सबसे प्यारे समाज सुधारक लगते हैं।*


डॉक्टर मेला

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