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न्याय की दुखद कहानी

 **₹100 में 39 साल - जागेश्वर सिंह की खोई हुई ज़िंदगी और दिवंगत न्याय की दुखद कहानी** 💔


एक ऐसे देश में जो सभी के लिए न्याय का सपना देखता है, एक व्यक्ति को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए **39 साल का लंबा इंतजार** करना पड़ा, **सिर्फ 100 रुपये की रिश्वत के झूठे आरोप** में।

न्याय की दुखद कहानी


मिलिए **89 साल के जागेश्वर सिंह** से, जिन्होंने लगभग चार दशक जेल में बिताए एक ऐसे अपराध के लिए जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था। जब अदालत ने आखिरकार उन्हें निर्दोष करार दिया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी - उनकी ज़िंदगी पहले ही बिखर चुकी थी।


उसकी पत्नी उसका इंतज़ार करते-करते मर गई, उसके बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया क्योंकि वह उनकी फीस नहीं भर पाया, और समाज ने उन्हें हमेशा के लिए "रिश्वतखोर का परिवार" कह दिया। सज़ा सिर्फ़ जेल नहीं थी - बल्कि अपमान, गरीबी और ज़िंदगी भर का दर्द था।


39 साल बाद सच सामने आया - लेकिन किस कीमत पर? न्याय में देरी, न्याय नकार बन गई।


जागेश्वर सिंह की कहानी महज एक त्रासदी नहीं है; यह एक सवाल है - **और कितनी निर्दोष आत्माएं देर से मिलने वाले न्याय के इंतजार में बूढ़ी होती जाएंगी?**


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