नर्स निमिषा प्रिया की ज़िंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था, जब उसने यमन में अपना एक छोटा-सा क्लिनिक खोलने का फैसला किया। वहां उसकी पहचान एक लोकल आदमी आब्दो महदी से हुई। शुरुआत में सब ठीक था, महदी ने कहा कि वो क्लिनिक खोलने में मदद करेगा। लेकिन बाद में वो वादा बस एक बात बनकर रह गया।
निमिषा ने बिना किसी की मदद के क्लिनिक शुरू कर लिया। और फिर महदी का असली चेहरा सामने आया। वो उसे परेशान करने लगा, खुद को उसकी दूसरी बीवी बताने लगा और बार-बार पैसों की मांग करता रहा। एक वक्त ऐसा आया कि निमिषा ने मजबूरी में पुलिस में केस दर्ज करवा दिया। कुछ दिन के लिए महदी जेल गया… लेकिन जब वापस आया, तो और भी खतरनाक बन गया। उसने निमिषा का पासपोर्ट ही छीन लिया।
अब पासपोर्ट वापस पाने के लिए, निमिषा ने एक प्लान बनाया। उसने महदी को बेहोश करने के लिए इंजेक्शन दिया, लेकिन डोज़ ज़्यादा हो गया और महदी की जान चली गई।
इसके बाद जो हुआ, वो बेहद डरावना था।
निमिषा ने अपनी यमनी साथी हनान के साथ मिलकर महदी की बॉडी के टुकड़े किए और उन्हें पानी के टैंक में फेंक दिया।
2018 में जब ये मामला खुला, तो यमन की अदालत ने निमिषा को फांसी की सजा सुना दी, और हनान को उम्रकैद मिली।
अब निमिषा पिछले कई सालों से यमन की जेल में है। उसका 8 साल का बेटा भारत में है, मां के बिना।
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